देखिए राजधानी में 30 फीसदी तक बढ़ सकता है बस-ऑटो का किराया, महंगाई से परेशान लोगों को लगेगा एक और झटका

बिहार ऑटो-चालक संघ के महासचिव राज कुमार झा ने बताया कि कोरोना महामारी के पिछले दो साल के दौरान ऑटो और बस ड्राइवर बहुत बुरे दौर से गुजरे हैं। अगर परिवहन आयुक्त अगले 10 दिनों में जवाब नहीं देते हैं, तो हम फिर से प्रस्ताव भेजेंगे। अगर दोबारा कोई जवाब नहीं आया तो हम खुद ही किराया बढ़ाने के लिए बाध्य हैं।

पटना : पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। इस बीच पटना में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने वालों को तगड़ा झटका लग सकता है। पटना में ऑटो और बस संचालक किराये में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। वहीं पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी के विरोध में ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन, बिहार के सदस्यों ने रविवार को प्रदर्शन किया। उन्होंने पटना जंक्शन से डाक बंगला क्रॉसिंग तक विरोध मार्च निकाला। साथ ही किराये में बढ़ोतरी की मांग रखी।

ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन-बिहार के महासचिव राज कुमार झा ने कहा कि वो परिवहन आयुक्त के पास किराए में 30 फीसदी बढ़ोतरी की अपनी मांग रखेंगे। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि अगर परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति उनके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देती है तो भी वे किराए में बढ़ोतरी करेंगे। इसकी वजह है बढ़ती लागत और ईंधन की कीमतों को लगातार हो रहा इजाफा। उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से उनके लिए मौजूदा किराये पर गाड़ियों को चलाना असंभव हो गया है।

एसोसिएशन ने किराये में बढ़ोतरी का जो फैसला लिया है उस पर नजर डालें तो यात्रियों को अब गांधी मैदान से पटना जंक्शन के लिए 13 रुपये और गांधी मैदान से दानापुर के लिए 39 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं अभी गांधी मैदान से पटना जंक्शन का वर्तमान किराया 10 रुपये और गांधी मैदान से दानापुर का किराया 30 रुपये है। दूसरे रूट पर भी इसी के तहत यात्री किराये में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है।

बिहार ऑटो-चालक संघ के महासचिव झा ने टीओआई को बताया कि कोरोना महामारी के पिछले दो साल के दौरान ऑटो और बस ड्राइवर बहुत बुरे दौर से गुजरे हैं। ईंधन की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी के साथ, घरेलू सामान, रसोई गैस और हर चीज की कीमतों में वृद्धि हुई है। सरकार गरीब लोगों के बारे में सोचे बिना ईंधन पर वैट और उत्पाद शुल्क वसूलती है। गाड़ियों के परिचालन और रखरखाव लागत बढ़ गई है और ड्राइवर को आर्थिक रूप से मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर परिवहन आयुक्त अगले 10 दिनों में जवाब नहीं देते हैं, तो हम फिर से प्रस्ताव भेजेंगे। अगर दोबारा कोई जवाब नहीं आया तो हम खुद ही किराया बढ़ाने के लिए बाध्य हैं।

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