देखिए चमकी बुखार का कहर आसपास के इलाकों में फिर से पनपा, मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में भी पनपा,

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले और उसके आसपास चमकी बुखार होने के कारण का एम्स की पांच सदस्यीय टीम पता लगाएगी। टीम ने जांच शुरू कर दी है। उनका कहना है कि इसका एक बड़ा कारण गर्मी हो सकता है, मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के बच्चों में चमकी क्यों होती है, इसका पता लगाने के लिए अब उनकी जीनोमिक्स जांच होगी,

एम्स जोधपुर से आयी पांच सदस्यीय टीम ने इसकी जांच शुरू कर दी है। टीम के सदस्यों ने बताया कि वे देखना चाहते हैं कि मुजफ्फरपुर व आसपास इलाके में एईएस के कारण में क्या कोई जीन से जुड़ी चीज भी है। टीम के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि एईएस होने का बड़ा कारण गर्मी है। हमने दस वर्षों के तापमान का अध्ययन किया है। इसके अलावा कुपोषण भी इसके कारण के रूप में सामने आ रहा है,

टीम मुजफ्फरपुर में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले भी वह मुजफ्फरपुर आए थे और टीम को काम करने के बारे में दिशा-निर्देश दिया था। जोधपुर से आयी टीम में डॉ. अरुण कुमार सिंह के अलावा डॉ. विजय किरण रेड्डी, उपेंद्र प्रसाद रजक, धर्मेश कुमार और मनीष कुमार शामिल हैं। टीम कांटी, मुशहरी और मीनापुर के 19 गांवों में जाकर रिसर्च कर रही है,

जीनोमिक्स एक विज्ञान है, जिसमें हम आर-डीएनए, डीएनए अनुक्रमण तकनीक व जैव सूचना विज्ञान का उपयोग कर जीनोम की संरचना, कार्य एवं अनुक्रमण का अध्ययन करते हैं। यह विधा जीवों के संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने का प्रयास है,

टीम ने बताया कि गर्मी और आर्द्रता जानने के लिए इन 19 गांवों के कुछ घरों में हीट सेंसर लगाए गए हैं। हीट सेंसर नये सिरे से लगाए गए हैं। पिछले वर्ष भी मोतीपुर, कांटी और मुशहरी के घरों में हीट सेंसर लगाए गए थे। डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि हीट सेंसर की रिपोर्ट बताती है कि घरों में तापमान काफी ज्यादा था,

टीम के सदस्यों ने बताया कि हमलोगों ने फिर से हीट सेंसर लगाए हैं। इससे पता चलेगा कि घर का तापमान कितना बढ़ रहा है। जिन घरों में टीम सर्वे करने गई थी, वहां हीट वेव निकलने का कोई रास्ता नहीं था। घर की छत भी काफी गर्म थी,

जोधपुर से आयी रिसर्च टीम इस बार यह जानेगी कि एईएस प्रभावित गांवों में बच्चे कितना पानी पी रहे हैं। एक सदस्य ने बताया कि एक गांव में वह गए थे। वहां बच्चे को एक घंटे तक पेशाब नहीं हुआ। हमारा अध्ययन इस ओर है कि कहीं कम पानी पीने से बच्चे हीट स्ट्रोक का शिकार तो नहीं हो रहे। बच्चों के पेशाब की भी जांच की जाएगी। इसमें देखा जायेगा कि इसमें कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं निकल रहा है। इसकी जांच बेंगलुरू में की जाएगी, 

टीम मुशहरी, कांटी और मीनापुर के गांवों के बच्चों में विटामिन की कमी की भी जांच करेगी। इस जांच में सीबीसी, विटामिन, कैल्शियम, विटामिन के की जांच करेगी। इस जांच से देखा जाएगा कि बच्चों में पोषक तत्व कितने हैं। इस जांच से बच्चों की इम्युनिटी का भी पता चलेगा। टीम का मानना है कि इम्युनिटी कमजोर होने से बच्चों में बीमारी हो सकती है, 

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