भागलपुर: इंजरी रिपोर्ट को लेकर गंभीर नहीं है बिहार के डॉक्टर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग; जानें पूरा मामला

विभिन्न पुलिस केस से जुड़े मरीजों की इंजरी रिपोर्ट (जख्म प्रतिवेदन) बनाने में बिहार के डॉक्टर जरा सा भी गंभीर नहीं हैं। अस्पताल में इलाज के लिए पुलिस केस से जुड़े मरीज आते हैं और इलाज कराकर चले जाते हैं। इन मरीजों से जुड़े मामलों की इंजरी रिपोर्ट (जख्म प्रतिवेदन) हासिल करने के लिए पुलिस अस्पतालों के चक्कर पर चक्कर लगा रही है। डॉक्टरों द्वारा जख्म प्रतिवेदन बनाने में हुई देरी का परिणाम यह हुआ कि विभिन्न आपराधिक मामलों की रिपोर्ट लगने में पुलिस फिसड्डी साबित हो रही है तो पीड़ितों को न्याय के लिए अनावश्यक दौड़ लगानी पड़ रही है।

पटना हाईकोर्ट में चले वाद रोहित कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार के मामले में खुलासा हुआ कि डॉक्टरों द्वारा मरीजों का जख्म प्रतिवेदन बनाने में डॉक्टर देरी करते हैं। इससे पुलिस को न केवल अनावश्यक अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है, बल्कि समय पर मामलों का निस्तारण नहीं हो पाता हैं। इसे लेकर पटना हाईकोर्ट ने सरकार को इस लापरवाही पर लगाम लगाने का आदेश जारी किया।

इसके बाद 31 मार्च को सरकार के अवर सचिव प्रतुल चंद्र सुमन ने बिहार के सभी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अधीक्षक व सभी जिले के सिविल सर्जन को पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया कि पटना हाईकोर्ट द्वारा आदेश जारी किया गया है कि जख्म प्रतिवेदन के मामले में अक्सर इलाज करने वाले डॉक्टर/संस्थान द्वारा संबंधित थानों के एसएचओ/जांच पदाधिकारी को बिलंब से केस की इंजरी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है। इससे आपराधिक मामलों में जांच का अनुसंधान सही समय पर करने में कठिनाई होती है।

पत्र में कहा गया कि ऐसे में निर्देश दिया जाता है कि किसी तरह के जख्म प्रतिवेदन से संबंधित मामले में इलाज करने वाले डॉक्टर/संस्थान द्वारा एक सप्ताह यानी सात दिनों के अंदर हर हाल में संबंधित थानों के एसएचओ/जांच पदाधिकारी को जख्म प्रतिवेदन उपलब्ध कराना होगा, ताकि अनुसंधान में गति प्रदान की जा सके। इसके लिए संबंधित थानों के एसएचओ/जांच पदाधिकारी के पत्र का इंतजार न किया जाये।

भागलपुर मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने कहा, ‘जांच प्रतिवेदन देने के लिए मायागंज अस्पताल के सभी विभागाध्यक्षों को आदेश जारी कर दिया गया है। अब हर मरीज का उसके इलाज के साथ ही जख्म प्रतिवेदन संबंधित चिकित्सक द्वारा तैयार करना होगा। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, भागलपुर के सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने कहा, ‘जख्म प्रतिवेदन बनाने को लेकर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि अब हर पुलिस केस से जुड़े मामले का जख्म प्रतिवेदन इलाज करने वाले डॉक्टर को 24 घंटे के अंदर बनाना होगा।

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