बिहार के सबसे बड़े जन्माष्टमी महोत्सव पर कोरोना का संकट, तेघड़ा, मंसूरचक में नहीं लगेगा मेला

वैश्विक महामारी कोरोना ने ना केवल अर्थव्यवस्था पर प्रहार किया है बल्कि समाजिक नीति और संस्कृति के साथ धार्मिक भावनाओं को भी आघात पहुंचाया है।
बिहार में सबसे बड़े जन्माष्टमी महोत्सव के रूप में चर्चित तेघड़ा जन्माष्टमी महोत्सव और मंसूरचक समसा में लगने वाले मेले श्री कृष्ण भक्तों के सबसे बड़े त्योहार जन्माष्टमी की इस बार मात्र औपचारिकता पूरी की जाएगी।कोरोना और लॉकडाउन के कारण 12 अगस्त को इस मौके पर कहीं कोई मेला या भीड़-भाड़ नहीं जुटाया जाएगा।

मंसूरचक और तेघड़ा में पिछले 92 साल से हर साल लगने वाला तीन दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मेला बिहार का सबसे बड़ा जन्माष्टमी मेला है। यहां मेला देखने के लिए बिहार के विभिन्न क्षेत्रों से ही नहीं, नेपाल, बंगाल, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, असम, एमपी, उड़ीसा, झारखंड के साथ विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय भी आते हैं। रक्षाबंधन के बाद से ही यहां हर ओर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) की धूम मचनी शुरु हो जाती थी।

देश के बड़े-बड़े ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के भव्य मंदिर की तर्ज पर बड़े-बड़े गेट बनाए जाते थे। करीब 15 किलोमीटर से अधिक का एरिया दुल्हन की तरह सजाया जाता था। लेकिन इस वर्ष कोरोना के कारण हर ओर मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है, कहीं कोई सजावट या तामझाम नहीं। सभी मण्डप समितियों की बैठक में फैसला लिया गया कि सभी मंडप में परंपरा निभाने के लिए छोटी प्रतिमा रखकर मात्र पूजा-अर्चना कर विसर्जन कर दिया जाएगा।बैठक में फैसला लिया गया कि 12 अगस्त की मध्य रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा,13 अगस्त को गुरुवार होने के कारण उस दिन विसर्जन नहीं होगा सिर्फ आंशिक मेला होगा और 14 अगस्त की शाम में मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाएगा।