प्रधानमंत्री निवास में मोर को दाना खिलाते दिखे पीएम मोदी, कविता भी लिखी- ‘मोर चहकता, मौन महकता’

आज सुबह से सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे मोदी जी अपने विशालकाय बंगले के दालान में मोर का दाना खिला रहे हैं एकड़ो में फैले गार्डन में मॉर्निंग वॉक कर रहे है आसपास मोर पंख फैलाकर नाच रहे है मोदी ने खुद इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम एकॉउंट पर डाला है

कल आपको बड़े बड़े सेलेब्रिटीज़ के एकॉउंट को मैनेज करने में PR एजेंसियों का क्या रोल होता है ये बताया था,….. दरअसल ये कम्पनिया लगातार सोशल मीडिया के डाटा के जरिए यूजर की प्रोफाइलिंग करती है उन्हें हर तरह का मटेरियल प्रोवाइड करती है उन्हें कब क्या दिखाना है ये डिसाइड करती है……….. आप को याद होगा कि पुलवामा अटैक के अगले ही दिन युद्ध , हिंसा पाकिस्तान विरोध के वीडियो की अचानक से भरमार आ गयी थी हर व्हाट्सएप यूजर के पास ऐसे ही वीडियो भेजे जा रहे थे एयर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद तो इस टाइप के मटेरियल ने मीम ने वीडियो ने माहौल को पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में कर दिया

केम्ब्रिज एनेलिटिका की सुनवाई में क्रिस्टोफर वायली जो एक डेटा साइंटिस्ट और साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग के एक्सपर्ट थे ओर कैंब्रिज एनालिटिका के रिसर्च हेड बने उन्होंने फेसबुक डाटा लीक के मामले में खुलासा किया कि बड़े पैमाने पर अफ्रीका में उनकी कम्पनी ने सरकारों को अस्थिर करने का काम किया है वायली ने उस सुनवाई में स्वीकार किया हैं कि “नाईजीरिया में चुनाव के समय कनाडा की कंपनी एग्रेगेट आईक्यू ने लोगों भयभीत करने के लिए हिंसक वीडियो वायरल किए। दुनिया भर की ऐसी बड़ी बड़ी PR एजेंसियां जिनके पास डेटा को समझने और हासिल करने की ताकत होती है, अब सोशल मीडिया यूजर 24-7 ऐसे मटेरियल प्रोवाइड करवाती है यूजर सिर्फ इनके मीम ओर वीडियो फारवर्ड करने वाला एजेंट बन कर रह जाता है

डाटा एनलिसिस करने वाली PR एजेंसियां सिर्फ चुनाव के वक्त ही सक्रिय हो ये जरूरी नही है अब यह पार्टी के टॉप लीडर की छवि को चमकाने के 24 घण्टे ओर 365 दिन काम करती है यह चुनाव का वक्त नही है अभी जनता कोरोना काल मे आर्थिक संकटों से जूझ रही है अभी उसे रिलेक्स मोड में डालने का समय है….इसलिए प्रधानमंत्री मोदी सावन भादौ में अपने बंगले के दालान में मोर के नृत्य का आनंद ले रहे है उसे दाना डाल रहे है ऐसा वीडियो बनाया जा रहा है……….

आप स्वयं सोचिए कि अगर आप खुद का ऐसा वीडियो शूट करवाना चाहो तो यह कितना टाइम टेकिंग जॉब होगा.…..लेकिन यह हो रहा है हमारे प्रधानमंत्री काम करने के बजाए ऐसे प्रोपेगेंडा वीडियो बनाने में मशगूल है और दुख इस बात का है कि हम सोशल मीडिया पर सही मुद्दों को उठाने के बजाए इन वीडियो और तस्वीरों को देखने के लिए मजबूर है…..

गिरीश मालवीय