टीचर हो तो ऐसा! गांव के स्कूल की बदल दी तस्वीर, बैलगाड़ी से किताब लेकर पहुंचे स्कूल

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के टीचर नीरज सक्सेना इस समय पूरे देश के लिए नजीर बन गए हैं. वह सालेगढ़ गांव के प्राथमिक स्कूल के टीचर हैं. उन्होंने अपनी मेहनत से एक सरकारी स्कूल को प्राइवेट स्कूल से बेहतर बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है. वह चर्चा में तब आए थे जब 4.5 किमी जंगल के रास्ते से स्टूडेंट्स के लिए बैलगाड़ी से किताबें लेकर पहुंचे थे.

अब नीरज सक्सेना को इस्पात मंत्रालय ने अपना ब्रांड एंबेस्डर बनाया है. उनपर डॉक्यूमेंट्री भी जारी की गई है. पूरे देश में उनके काम की सराहना हो रही है. 

बता दें कि सालेगढ़ गांव में जंगल के करीब प्राथमिक स्कूल है. साल 2009 से नीरज वहां पढ़ा रहे हैं. उस समय वहां सिर्फ 15 बच्चे थे. वे भी कभी-कभी पढ़ने आते थे. नीरज ने इसपर काम शुरू किया. बच्चों के माता-पिता से बात की. उन्हें समझाया. फिर बच्चों को समझाए. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी.

आज स्कूल में बच्चों की संख्या 94 है. बच्चे अब पढ़ने में रुची भी रखते हैं. गांव की पहले पत्थर, जंगल और पहाड़ के रूप में पहचान थी, लेकिन अब इसकी पहचान इस आदर्श स्कूल के रूप में भी है. नीरज के इस स्कूल के बारे में कुछ लोगों ने दिल्ली में चर्चा की. इसके बाद इस्पात मंत्रालय के कर्मचारियों को नीरज के काम करने का तरीका जंच गया.

मंत्रालय ने रायसेन के कलेक्टर से बात की. इसके बाद स्कूल और नीरज पर डॉक्युमेंट्री की योजना बनी. दिल्ली से एक टीम आई. इसके बाद डॉक्युमेंट्री तैयार हो गई. नीरज के स्कूल में पर्यावरण को लेकर जागरुकता से लेकर स्कूल में लगी तख्तियां, बच्चों की ड्रेस, प्रतिभा, पढ़ाई का स्तर इन सबकी तारीफ हो रही है.

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