समस्तीपुर जंक्शन से दूर हुआ सन्नाटा, दिल्ली के लिए खुली ट्रेन

समस्तीपुर । ट्रेनों का आंशिक तौर पर सामान्य परिचालन सोमवार से शुरू हो गया। 10 से 10:30 के बीच समस्तीपुर से दो ट्रेनें खुलीं। दोनों ही दिल्ली जानेवाली थीं। इस दौरान जंक्शन की पुरानी इंक्वायरी के पास बने इंट्री प्वाइंट से ही यात्रियों को प्रवेश मिला। यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिग के साथ ही शारीरिक दूरी पर पूरा जोर दिया गया। यात्रियों की संतोषजनक संख्या को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि लोग कितनी बेसब्री से ट्रेनों के सामान्य परिचालन का इंतजार कर रहे थे। पूरे स्टेशन को सैनिटाइज किया गया था। सभी यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिग के साथ-साथ उनके सामान को भी सैनिटाइज किया जा रहा था। स्टेशन पर एक मेडिकल टीम भी तैनात रही। वहीं, आरपीएफ भी हरेक प्वाइंट पर सक्रिय रही। ट्रेनों की रैक को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया।

समस्तीपुर मंडल के दरभंगा, सहरसा स्टेशन और यार्ड में खड़ी ट्रेनों की रैक को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया। इसके बाद वैशाली और बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस समस्तीपुर आई। ट्रेनों में ड्यूटी पर तैनात टिकट निरीक्षक एवं टेक्नीशियन पूरी सुरक्षा किट में ड्यूटी पर आए। जेनरल बोगी में भी था सीटिग अरेंजमेंट

समस्तीपुर जंक्शन पर केवल दो द्वार ही खुले रहे। एक से यात्री आएंगे तो दूसरे से निकलेंगे। स्टेशन के सर्कुलेटिग एरिया में बैरियर लगाकर दो भागों में विभक्त किया गया। एंट्री प्वाइंट पर ही सभी का थर्मल स्क्रीनिग के बाद ही उन्हें इंट्री दी गई। सामान्य बोगी में भी सीमित यात्री को ही बैठने की अनुमति मिली। सभी को सीट आवंटित थी। यात्रियों की स्क्रीनिग के बाद ही मिलेगा प्रवेश

प्रवेश द्वार पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिग की गई। थर्मल स्कैनिग के बाद ही यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर प्रवेश मिला। इस कार्य में मेडिकल स्टाफ चौकस रहे। इसके अलावा आरपीएफ भी वहां तैनात रही। एसी बोगी में सामान्य व्यवस्था, पर्दे गायब

सभी स्मार्ट यात्री जो एसी में सफर करनेवाले थे। उनके मोबाइल (स्मार्ट फोन) में आरोग्य सेतु एप की भी जांच की गई। हालांकि, एसी में उनका यह सफर कुछ बदला हुआ था। सामान्य तापमान में एसी चालू था, लेकिन उस बोगी की खिड़की बिना पर्दा के ही थी। बेडशीट, तौलिया, कंबल आदि भी नहीं दिया जा रहा था। फेस कवर या मास्क से कवर्ड थे यात्री

कोविड के खतरे को देखते हुए यात्रा करनेवाले सभी यात्रियों के लिए फेस कवर या मास्क का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया था। सभी यात्री अपने चेहरे पर मास्क लगाए हुए दिखे। सभी कर्मी भी फेस मास्क व ग्लव्स से थे लैस

रेलवे स्टेशन व ट्रेन के अंदर कार्यरत सभी कर्मी फेस मास्क व ग्लव्स से लैस रहे। इसमें टिकट जांच दल के अलावा परिचालन, सफाई, सुरक्षा से जुड़े कर्मी शामिल थे। निर्धारित समय से पूर्व ही पहुंचे थे यात्री

जारी गाइडलाइन को देखते हुए यात्रा को इच्छुक रेल यात्री गाड़ी के निर्धारित प्रस्थान समय से कम से कम दो घंटे पूर्व स्टेशन पर दिखे। हालांकि, वे प्रवेश नहीं कर पाए। नब्बे मिनट पूर्व सभी को पंक्तिबद्ध कर उनकी जांच शुरू हुई तब जाकर वे प्रवेश पा सके। शारीरिक दूरी पालन करने को लेकर किए गए इंतजाम

यात्रियों को स्टेशन अथवा गाड़ी में शारीरिक दूरी का ध्यान रखना होगा। इस दूरी को मेंटेन करने के लिए बार-बार उद्घोषणा की जा रही थी। प्रवेश प्वाइंट पर भी लाल-लाल घेरा बनाया गया था। उसपर ही खड़े होकर यात्री अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे। पैंट्रीकार में उपलब्ध था पैक्ड खाद्य पदार्थ

सभी ट्रेनों में कंबल, चादर, तकिया, तौलिया आदि की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसलिए यात्री अपने घर से चादर-तकिया लाए हुए थे। पैंट्रीकार वाली गाड़ियों में सीमित मात्रा में पैक्ड खाद्य पदार्थ उपलब्ध थे। वैसे कई यात्रियों ने कहा कि हम तो अपने घर से ही खाना लेकर आए हैं। राउंड द क्लॉक होती रही साफ-सफाई

यूं तो कोविड-19 के आरंभिक दिनों से ही स्टेशनों पर साफ-सफाई की व्यवस्था कारगर ढंग से लागू है। पर, फिर से विशेष ट्रेन चलाए जाने के बाद से इस व्यवस्था को और बढ़ा दी गई है। राउंड द क्लॉक कर्मी स्टेशन के विभिन्न प्लेटफार्म पर रखे सामान, फर्श को सैनिटाइज करते दिखे। वहीं सीनियर सीएचआइ भी एनके दास भी खुद चौकस रहे।