समस्तीपुर-काम की तलाश, लौट चले प्रवासी

समस्तीपुर। कोरोना संक्रमण के भय व लॉकडाउन के बाद प्रवासी गांव लौट रहे। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर जब रोजगार नहीं मिला तो काम की तलाश में पुरानी जगहों पर लौट चले। उनमें कोरोना संक्रमण से ज्यादा रोजगार के अभाव में भूखे मरने का भय ज्यादा है। बुधवार को दिल्ली और अमृतसर जाने के लिए स्थानीय स्टेशन पर एक दर्जन से अधिक लोग पहुंचे थे। कहा कि यहां काम का अभाव है। परिवार का पेट भरना मुश्किल। उम्मीद से घर आए थे। लॉकडाउन में दो महीने से अपने गांव में थे। अब ट्रेनें शुरू हुईं। रोजगार की तलाश में फिर से जा रहे। यहां रोजगार नहीं मिल रहा है, रहेंगे तो भूखे मर जाएंगे। कल्याणपुर के रहनेवाले कुछ लोग ट्रेन पकड़ने समस्तीपुर स्टेशन पहुंचे थे।

इनलोगों ने अमृतसर जानेवाली शहीद एक्सप्रेस में अपना टिकट आरक्षित करवाया था। गांव छोड़ कर पंजाब जानेवाले प्रवासियों में पांच पुरुष एवं छह महिलाएं शामिल थीं। उनके दो बच्चे भी थे। बताया कि सीधा अमृतसर जाएंगे। घर लौटने पर काम नहीं मिला तो फिर से पुरानी जगहों पर लौट रहे। फैक्ट्री में काम कर काट ले रहे थे जिदगी कल्याणपुर निवासी इस परिवार के मुखिया राजाराम बताते हैं कि अमृतसर में फैक्ट्री में काम कर जिदगी कट जाती है। गांव में खेती कर जीवनयापन करना संभव नहीं है। एक तो यहां अपना खेत नहीं है। दूसरी सुविधाओं के अभाव में किसान ही खेती नहीं कर पाते हैं। किसान खुद खेती कर घाटे में रहते हैं तो हम मजदूरी करनेवालों को यहां रोजगार क्या मिलेगा। ये अमृतसर में लंबे समय से मजदूरी करते हैं। काफी समय बाद मार्च में अपने गांव आए थे। लॉकडाउन उनके लिए मुसीबत बना। गांव पर न तो रोजगार था और न ही कोई सरकारी सहायता। परिवार का पेट भरना मुश्किल हो गया था। ट्रेनों के परिचालन की घोषणा हुई तो रिजर्वेशन करवाया। समस्तीपुर से 415 लोगों ने की यात्रा बुधवार को समस्तीपुर जंक्शन से 415 लोगों ने अपनी यात्रा अन्य प्रदेशों के लिए की। इसमें बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से 128, वैशाली सुपरफास्ट से 80 एवं शहीद एक्सप्रेस से 127 एवं लोकमान्य तिलक टर्मिनल के लिए 80 लोगों ने अपनी यात्रा की।